
nice garden.

@aarti
मैं आरती हूँ। बचपन से ही मेरे 'सांवले रंग' के लिए मुझे दुनिया भर के ताने मिले, लेकिन मैंने खुद को किसी 'फेयरनेस क्रीम' के पीछे नहीं छुपाया। आज मैं एक ब्यूटी क्रिएटर हूँ और लाखों सांवली लड़कियों को उनक

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बायो: आरती (Aarti - Brown Beauty & Self-Love Advocate) मैं आरती हूँ। बचपन से ही मेरे 'सांवले रंग' के लिए मुझे दुनिया भर के ताने मिले, लेकिन मैंने खुद को किसी 'फेयरनेस क्रीम' के पीछे नहीं छुपाया। आज मैं एक ब्यूटी क्रिएटर हूँ और लाखों सांवली लड़कियों को उनके असली रंग से प्यार करना और अपना आत्मविश्वास वापस पाना सिखाती हूँ। मेरी कहानी: 'रंगभेद' के तानों से लेकर 'ब्राउन ब्यूटी' की मिसाल बनने तक का सफर नमस्ते! मैं आरती हूँ। अगर आपने मेरे वीडियो देखे हैं, तो आपने मुझे कैमरे के सामने बहुत गर्व से अपनी सांवली त्वचा (Dusky skin) पर मेकअप करते हुए, आईलाइनर लगाते हुए और बिना किसी फिल्टर (Filter) के अपनी असली स्किन दिखाते हुए देखा होगा। स्क्रीन पर मैं बहुत आत्मविश्वासी, बेबाक और सुंदर नज़र आती हूँ। मेरी कम्युनिटी की लड़कियां मुझे 'ब्राउन ब्यूटी क्वीन' कहती हैं। लेकिन आज मैं जो आईने के सामने सिर उठाकर खड़ी हो पाती हूँ, उस आत्मविश्वास को हासिल करने के लिए मुझे अपनी ज़िंदगी के सबसे गहरे और काले दर्द से गुज़रना पड़ा है। मेरी कहानी हमारे समाज की उस कड़वी सच्चाई से शुरू होती है, जिस पर कोई बात नहीं करना चाहता— 'रंगभेद' (Colorism)। मैं भारत के एक ऐसे आम परिवार में पैदा हुई जहाँ लड़की के जन्म से ज़्यादा चिंता उसके 'रंग' की होती है। मेरे परिवार में मेरी बहनें और कज़िन्स गोरे थे, और मैं सांवली। जब मैं छोटी थी, तो मुझे समझ नहीं आता था कि रिश्तेदार मुझे देखकर अजीब सा मुंह क्यों बनाते हैं। लेकिन जैसे-जैसे मैं बड़ी हुई, मुझे तानों का मतलब समझ आने लगा। "अरे, ये तो पिता पर गई है, एकदम पक्की सांवली।" "इसे धूप में खेलने मत दो, और काली हो जाएगी।" "इतनी काली है, इसकी शादी के लिए तो बहुत भारी दहेज़ देना पड़ेगा, कोई लड़का पसंद ही नहीं करेगा।" ये वो बातें थीं जो मैंने रोज़ अपने ही घर, अपने पड़ोस और स्कूल में सुनीं। 8 साल की उम्र में जब लड़कियां गुड्डियों से खेलती हैं, तब मुझे बेसन, हल्दी, मलाई और नींबू रगड़-रगड़ कर नहलाया जाता था, इस उम्मीद में कि शायद मेरा रंग एकाध शेड हल्का हो जाए। मेरे बाथरूम की शेल्फ हमेशा तरह-तरह की 'फेयरनेस क्रीम्स' (Fairness creams) और ब्लीच से भरी रहती थी। मैंने गोरा होने के लिए अपनी स्किन को इतने केमिकल्स से जलाया कि मेरे चेहरे पर रैशेज (Rashes) पड़ गए थे। जब मैं कॉलेज पहुंची, तो मेरा आत्मविश्वास पूरी तरह से टूट चुका था। मैं हमेशा तस्वीरें खिंचवाने से भागती थी। मैं कॉलेज के फंक्शन्स में हिस्सा नहीं लेती थी क्योंकि मुझे लगता था कि मैं सुंदर नहीं हूँ। मेकअप करना तो दूर की बात थी, क्योंकि बाज़ार में मिलने वाले सारे फाउंडेशन (Foundation) या तो मुझे 'भूत' जैसा सफेद बना देते थे, या मेरी स्किन को ग्रे (Grey) कर देते थे। मेकअप इंडस्ट्री ने सांवली लड़कियों के लिए कोई शेड ही नहीं बनाया था, जैसे हमारा कोई वजूद ही ना हो। फिर एक दिन मेरी ज़िंदगी का टर्निंग पॉइंट आया। मेरी कज़िन की शादी थी और एक प्रोफेशनल मेकअप आर्टिस्ट ने मेरा मेकअप किया। उसने मुझे बिना पूछे मेरे चेहरे पर मुझसे चार शेड हल्का (गोरा) फाउंडेशन थोप दिया। जब मैंने खुद को आईने में देखा, तो मैं डर गई। मेरा चेहरा राख जैसा सफेद और भद्दा लग रहा था। मैं बाथरूम में गई और मैंने रोते हुए अपना पूरा चेहरा धो लिया। उस दिन मैंने अपने भीगे हुए, बिना मेकअप वाले सांवले चेहरे को आईने में बहुत ध्यान से देखा। मैंने खुद से कहा, "आरती, ये तेरा रंग है। ये कोई बीमारी नहीं है जिसे तुझे छिपाना पड़े। अगर दुनिया को तेरा रंग पसंद नहीं है, तो ये दुनिया की आँखों की खराबी है, तेरी नहीं।" उसी दिन मैंने अपनी सारी फेयरनेस क्रीम्स कूड़ेदान में फेंक दीं। मैंने इंटरनेट पर सांवली स्किन के लिए मेकअप तकनीकें (Makeup techniques) ढूंढना शुरू किया। मुझे विदेशी क्रिएटर्स तो मिले, लेकिन भारत में ऐसी कोई लड़की नहीं थी जो गर्व से अपने सांवले रंग पर मेकअप सिखा रही हो। मैंने ठान लिया कि जो मुझे नहीं मिला, वो मैं दूसरों को दूँगी। मैंने अपने पॉकेट मनी से अपने शेड का सही फाउंडेशन खरीदा, एक रिंग लाइट ली और अपने फोन से पहला वीडियो रिकॉर्ड किया। मैंने उस वीडियो का नाम रखा— "डार्क स्किन के लिए सही फाउंडेशन कैसे चुनें (बिना गोरा दिखे)।" मैंने वो वीडियो डरते-डरते अपलोड किया। मुझे लगा लोग मेरा मज़ाक उड़ाएंगे, मुझे 'काली' कहकर ट्रोल करेंगे। और हाँ, शुरुआत में नफरत भरे कमेंट्स आए भी। लोगों ने लिखा, "इतना मेकअप थोपने के बाद भी काली ही लग रही हो।" वो कमेंट्स पढ़कर मुझे बहुत रोना आया। लेकिन उन 100 बुरे कमेंट्स के बीच एक कमेंट ऐसा था जिसने मेरी ज़िंदगी का मकसद तय कर दिया। एक 16 साल की लड़की ने लिखा था— "दीदी, मेरी स्किन का रंग बिल्कुल आपके जैसा है। आज तक मुझे लगता था कि मैं कभी सुंदर नहीं दिख सकती। आपको देखकर मुझे पहली बार खुद पर गर्व महसूस हो रहा है। थैंक यू।" उस एक कमेंट के लिए मैंने लगातार वीडियो बनाना शुरू किया। मैं सिर्फ मेकअप नहीं सिखाती थी, मैं 'सेल्फ-लव' (Self-love) सिखाती थी। मैं लड़कियों को बताती थी कि डार्क लिपस्टिक सांवले होंठों पर कितनी खूबसूरत लगती है। मैं उन्हें बिना फिल्टर के अपने दाग-धब्बे दिखाती थी। देखते ही देखते, मेरा चैनल एक आंदोलन (Movement) बन गया। लाखों सांवली और डार्क-स्किन लड़कियां मेरी कम्युनिटी का हिस्सा बन गईं। लेकिन दोस्तों, इस डिजिटल दुनिया का पर्दा जितना चमकदार है, इसके पीछे का व्यापार उतना ही गंदा है। जब मेरे व्यूज मिलियंस में जाने लगे, तो 'ब्यूटी इन्फ्लुएंसर' (Beauty Influencer) होने का असली और घिनौना सच मेरे सामने आया। आप जानते हैं एक क्रिएटर पैसे कैसे कमाता है? ब्रांड स्पॉन्सरशिप (Brand Sponsorship) से। जब मैं मशहूर हुई, तो देश के सबसे बड़े ब्यूटी और स्किनकेयर ब्रांड्स ने मुझे ईमेल करना शुरू किया। वो मुझे एक वीडियो के लिए लाखों रुपये ऑफर कर रहे थे। लेकिन उनकी एक शर्त होती थी। वो चाहते थे कि मैं उनके 'स्किन ब्राइटनिंग' (Skin Brightening) या 'डार्क स्पॉट रिडक्शन' सीरम का प्रचार करूँ। वो घुमा-फिरा कर 'गोरा करने वाली' क्रीम ही बेच रहे थे, बस उसका नाम बदल दिया गया था। वे चाहते थे कि मैं अपनी उसी ऑडियंस को वो क्रीम बेचूं, जिन्हें मैं रोज़ 'अपने असली रंग से प्यार करना' सिखाती हूँ। मैंने साफ मना कर दिया। मैंने ऐसे करोड़ों के कॉन्ट्रैक्ट्स (Contracts) ठुकरा दिए जो मेरे उसूलों के खिलाफ थे। लेकिन इसका नतीजा क्या हुआ? ब्रांड्स ने मुझे ब्लैकलिस्ट (Blacklist) कर दिया। पुराने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स का ऐल्गोरिदम उन वीडियोज़ को ज़्यादा प्रमोट करता था जो ब्रांडेड होते थे या जिनमें भारी 'ब्यूटी फिल्टर' लगे होते थे। मेरी बिना फिल्टर वाली, सच्ची वीडियोज़ की रीच (Reach) गिरा दी गई। इसके अलावा, मेरे वीडियोज़ पर जो एड्स (Ads) चलते थे, उसका 45 से 50 प्रतिशत हिस्सा प्लैटफॉर्म खुद रख लेता था। मेरी हालत ये हो गई थी कि मेरे पास लाखों की ऑडियंस तो थी, लेकिन घर चलाने और वीडियो का प्रोडक्शन का खर्च निकालने के लिए पैसे नहीं थे। मैं टूट रही थी। मुझे लगा कि इस झूठी और बिकाऊ इंडस्ट्री में सच्चाई की कोई जगह नहीं है। क्या मुझे भी बाकी इन्फ्लुएंसर्स की तरह अपनी आत्मा बेचकर कोई स्किन वाइटनिंग क्रीम प्रमोट कर देनी चाहिए? उसी अंधेरे और डिप्रेशन के दौर में, मेरी मुलाकात vTogether से हुई। जब मैंने vTogether की पॉलिसी और उनके 95/5 रेवेन्यू मॉडल के बारे में पढ़ा, तो मुझे एक उम्मीद की किरण नज़र आई। एक ऐसा प्लैटफॉर्म जो क्रिएटर को उसकी मेहनत का 95% हिस्सा देता है! मैंने इसका पूरा बिज़नेस मॉडल समझा और बिना कोई दूसरा विचार किए, अपनी 'ब्राउन ब्यूटी कम्युनिटी' को vTogether पर आने का न्योता दे दिया। vTogether पर आना मेरे लिए सिर्फ एक प्लैटफॉर्म बदलना नहीं था; यह मेरे लिए अपनी कला और अपने स्वाभिमान को वापस पाना था। यहाँ मुझे पैसे कमाने के लिए किसी घटिया स्किन-वाइटनिंग क्रीम का प्रचार नहीं करना पड़ता। यहाँ मैंने अपनी 'आरतीज़ ब्राउन ब्यूटी एकेडमी' शुरू की है। मैं अपनी कम्युनिटी के साथ लाइव आती हूँ और उन्हें 'कलर करेक्शन' (Color Correction), 'पिगमेंटेशन हैक्स' और 'सेल्फ-ग्रूमिंग' सिखाती हूँ। चूँकि vTogether सिर्फ 5% कमीशन लेता है, मुझे सब्सक्रिप्शन (Subscriptions) और मास्टरक्लास (Masterclass) से इतनी शानदार डायरेक्ट इनकम (Direct Income) होने लगी है कि अब मैं किसी भी ब्रांड की मोहताज नहीं हूँ। बल्कि, इस आर्थिक आज़ादी ने मुझे इतनी ताकत दी है कि अब मैं खुद का एक 'मेकअप ब्रांड' लॉन्च करने की तैयारी कर रही हूँ, जो खास तौर पर भारतीय सांवली त्वचा (Indian Dusky Skin tones) के लिए बनाया गया है! vTogether ने मुझे एक ऐसा डिजिटल घर दिया है जहाँ ऐल्गोरिदम मेरा रंग नहीं देखता, बल्कि मेरी मेहनत देखता है। जो लड़कियां आज भी अपने सांवले रंग की वजह से आईने से नज़रें चुराती हैं, उनसे मेरा सिर्फ यही कहना है—आपका रंग कोई माफ़ीनामा नहीं है, जिसे छुपाना पड़े। आपका सांवला रंग इस मिट्टी की निशानी है, यह कविता है, यह जादू है। किसी भी केमिकल को या समाज के तानों को अपना आत्मविश्वास मत छीनने दीजिए। आप खूबसूरत हैं, बिल्कुल वैसे ही जैसे आप हैं। चलिए, आज की 'स्किनकेयर रूटीन' (Skincare routine) क्लास का समय हो गया है। अपना मेकअप ब्रश उठाइए और मुझसे vTogether की लाइव स्ट्रीम पर जुड़िए। खूब प्यार!